शिक्षक हैं या मल्टी टास्किंग मशीनें… लिंक पर क्लिक कर आगे पढ़ें…
विद्या के दरबार सजल बा,अन्न-अण्डा के थाली से। शिक्षक के सम्मान होत बा,रोज गांव में गाली से।। गुरू के गरिमा गोबर भईले,खुला शौच रखवाली से काम मिलल बा उटपटांग,शिक्षा के अधिकारी से। एम डी एम के चिंता औरु,फुरसत ना तरकारी से। रुठ गईली विद्या के देवी,विद्यालय सरकारी से। इस कविता को पढ़ने के बाद आपको…


