शिक्षक, साहित्य समाज का दर्पण है- घनश्याम
बलिया, बेगूसराय। गुरु-शिष्य की कहानियों को हम लोग आज भी सुन रहे हैं। अपनी संस्कृति सभ्यता के माध्यम से जहां माता-पिता के बाद तीसरा स्थान गुरु को दिया गया है जो हमारे इतिहास में भी वर्णित है। जहां गुरु के लिए शिष्य अपना अंगूठा काटकर गुरु को गुरु दक्षिणा में दे दिया। जहां गुरु को…


