दरभंगा:सांसद कीर्ति आजाद ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दरभंगा आगमन का स्वागत करते हुए केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। कहा, भाजपा चाहती थी कि मैं हाथ उठाने वाला नेता रहूं लेकिन मेरे लिए मिथिला की जनता, उनका हित स्वाभिमान की रक्षा सबसे ऊपर है। मैं हाथ उठाने वाला नेता न था, न हूं और न किसी कीमत पर बन सकता हूं। उन्होंने कहा कि हर स्तर पर केंद्रीय सरकार मिथिलांचल की उपेक्षा पर उतारू है। मिथिलांचल में नई रेल लाइन परियोजना, एम्स केंद्रीय विद्यालय की स्थापना, राष्ट्रीय उच्च पथ के चयन में मिथिला की उपेक्षा पर सवाल उठाते कहा कि इस उपेक्षा से आहत हूं। हवाई सेवा से लेकर रोजगार सृजन में केंद्र सरकार की लचर नीति पर उन्होंने सवाल उठाते पूछा कि आखिर समस्तीपुर-दरभंगा दोहरीकरण कार्य की धीमी रफ्तार का जिम्मेदार केंद्र सरकार सर्वाधिक पिछड़ा क्षेत्र लोहना-तारडीह-अलीनगर-घनश्यामपुर होते मुक्तापुर तक नई रेल परियोजना को इस वर्ष स्वीकृति क्यों नहीं दी। मधुबनी-रहिका-बेनीपट्टी-सीतामढ़ी नई रेल लाइन परियोजना में भेदभाव कर जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया गया। दरभंगा- मुजफ्फरपुर नई रेल लाइन परियोजना पर कार्य नहीं शुरू कर केंद्र ने मिथिला की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया। दरभंगा स्टेशन की सफाई नहीं हो रही। समय से ट्रेनों का परिचालन नहीं होने से यात्री हलकान हैं। ट्रेनों का परिचालन घंटों विलंब से हो रहा और रेल मंत्रालय चैन में है।
दरभंगा, सकरी, बिरौल स्टेशनों की हालत दयनीय है। यहां सौंदर्यीकरण कार्य ठप है। समस्तीपुर-दरभंगा-नरकटियागंज रेलखंड में स्वीकृत विद्युतीकरण परियोजना का कार्य अब तक शुरू नहीं हुआ। सांसद आज़ाद ने केंद्र के तीन साल और मिथिला के साथ सौतेला व्यवहार पर जमकर प्रहार करते कहा कि नए एम्स पर मिथिलांचल का अधिकार है। रेलवे भर्ती बोर्ड पटना मुजफ्फरपुर के बाद दरभंगा में खोला जाना चाहिए लेकिन केंद्र सरकार ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। उन्होंने कहा कि बेरोजगार युवा रोजगार सृजन के मामले में केंद्रीय सरकार की उपेक्षात्मक नीति पर उनसे सवाल पूछते हैं तो मैं चुप रह जाता हूं। केंद्रीय सरकार ने प्रतिवर्ष दो करोड़ रोजगार देने का आश्वासन दिया था लेकिन हकीकत सबके सामने है। स्वरोजगार के लिए युवा भटक रहे। बैंकों का रवैया नकारात्मक है। किसानों को समर्थन मूल्य के साथ लागत मूल्य का पचास फीसदी देने का केंद्रीय आश्वासन सब्जबाग ही बना हुआ है। राष्ट्रीय उच्च पथ के चयन में मिथिलांचल की उपेक्षा हुई। दरभंगा से हवाई सेवा आरंभ करने की योजना अधर में है। मधुबनी जैसे जिले में एक केंद्रीय विद्यालय की स्वीकृति नहीं दी गई है।
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