Error 404! अमेजन के बाद अब Google भी आया भारत के रडार पर

INDIA

Google, एप्पल, फेसबुक, माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न, अमेरिकी टेक इंडस्ट्री की 5 सबसे बड़ी कंपनियां हैं। इन कंपनियों को विश्व में सबसे प्रभावी शक्ति के रूप में पहचाना जाता है। अपने आर्थिक प्रभुत्व का प्रयोग करके यह कंपनियां किसी देश की संप्रभु सरकार को चुनौती दे सकती हैं, पद पर रहते हुए भी अमेरिकी राष्ट्रपति की आवाज बंद कर सकती हैं, दुनिया भर के लोगों का डाटा चोरी कर सकती हैं। किंतु भारत में अपनी दोषपूर्ण नीतियों के कारण इन कंपनियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

कंपटीशन कमिशन ऑफ इंडिया (CCI) ने अमेजन के बाद गूगल के विरुद्ध कार्रवाई शुरू की है। सीसीआई ने कहा, ‘‘सुचारू रूप से काम कर रहे लोकतंत्र में समाचार मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका को कम कर के नहीं आंका जा सकता है। और, यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि डिजिटल कंपनी सभी स्टेक होल्डर्स के बीच आय का उचित वितरण निर्धारित करने की प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने के लिए अपनी मजबूत स्थिति का दुरुपयोग न करे।’’ डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) ने CCI के पास गूगल की मातृ संस्था अल्फाबेट inc, गूगल एलएलसी, गूगल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और गूगल आयरलैंड लिमिटेड के विरुद्ध शिकायत दर्ज करवाई है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, “CCI ने ताजा आदेश में माना है कि गूगल एकाधिकार का दुरुपयाेग कर डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स पर अनुचित शर्तें थाेप रहा है। आयाेग ने गूगल और इसकी मूल कंपनी अल्फाबेट के विरुद्ध जांच रिपाेर्ट 60 दिन के भीतर तलब की है। डिजिटल न्यूज़ पब्लिशर्स एसोसिएशन ने शिकायत में कहा कि गूगल एल्गोरिदम मनमाने तरीके से तय कर देता है कि कोई जानकारी खोजने पर कौन सी वेबसाइट सबसे ऊपर दिखेगी। यही नहीं, भारतीय न्यूज प्रकाशक गुणवत्तापूर्ण कंटेंट के लिए बड़ा निवेश करते हैं, लेकिन विज्ञापन राशि का काफी बड़ा हिस्सा गूगल रख लेता है, जबकि वह कंटेंट क्रिएट नहीं करता।”

अर्थात् कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया ने जिन दो मामलों में जांच शुरू की है, उनमें प्रथम यह है कि गूगल मनमाने ढंग से कुछ वेबसाइट को अपने सर्च इंजन के माध्यम से बढ़ावा देता है और कुछ वेबसाइट तक लोगों की पहुंच सीमित करता है। दूसरा मामला यह है कि गूगल पर हम जो कंटेंट पढ़ते हैं, उसे कोई मीडिया समूह अथवा रिसर्च फाउंडेशन तैयार करती है, किंतु उस कंटेंट को पढ़ते समय उस पर चलने वाले ऐड से जो आर्थिक लाभ होता है, वह गूगल को मिलता है। ऐसे में मूल कंटेंट राइटर को उसकी मेहनत के बदले रॉयल्टी शेयर कम मिलता है, जबकि गूगल को केवल मंच उपलब्ध कराने के लिए अधिक शेयर मिलता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.