मिल्लीतंजीम तीन तलाक मामले में छेडछाड़ ना करे – डा. एजाज अहमद ,अल्पसख्यक एक्ट बनाने की माग करें मस्लिम बद्धिजीवि

    बेगूसराय, ब्यूरों। तीन तलाक के मामले को अब छेड़छाड़ ना करे मिल्लीतंजीम। सुप्रीम कोर्ट के फैसले काबिले कबूल है। अल्पसंख्यकों का भी अलग एक्ट बनना चाहिए, जिस तरह से एससी/एसटी एवं अन्य एक्ट बने हैं। उसी तरह हिंदू-मुसलमान दंगा को रोकने के लिए अलग एक्ट बनाया जाए। शाह बानो का मामला जिस तरह से पूरे मुल्क में तूल पकड़ा और आज वो एक्ट हिन्दुस्तान के कानून में शुमार हो गया। कौम के दुश्मन चाहते हैं कि मुसलमानों को बहला फुसलाकर आपस में लड़ाकर, इस्लामी धर्म के किताबों मे छेड़छाड़ कर उनका वोट हासिल करते रहे।




    ऐसा ही होता आया है। इसलिए अब हिन्द के मुसलमानों को चाहिए कि अपने वजूद और वकार के लिए सड़क पर उतर कर अपने हक की लड़ाई लड़े और मुसलमानों का भी एक नया एक्ट बनाने की मांग करें। ताकि जिस तरह से आज बीच चैराहों पर गाय के नाम पर, लव जेहाद समेत अन्य मुद्दों को लेकर जो मुसलमानों को पीटा जा रहा है। यह कम से कम एक्ट आने पर कोई भी आदमी मारपीट करने या छेड़छाड़ करने से गुरेज करेंगे। जिस तरह से आज एससी/एसटी एवं आदिवासियों का अलग एक्ट होने से उसे छेड़ने और थप्पड़ मारने के लिए सौ बार सोचना पड़ता है, उसी तरह हम पर जुल्म करने वाले भी सोचेंगे। वहीं उन्होंने कहा कि देश दंगामुक्ता व नंगामुक्त होगा। उक्त बातें राज्य सभा के पूर्व सांसद डा. मो. एजाज अहमद ने बेगूसराय शहर के कचहरी मस्जिद स्थित अलशिफा मल्टी स्पेशिलिटी हाॅस्पीटल में डा. इरशाद आलम के चैम्बर में पे्रस वार्ता को संबोधित करते हुए कही। उन्हांेने कहा कि शाह बानो का केस जब तूल पकड़ा तो मौजूदा प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने बाबरी मस्जिद का ताला खोलवाकर मुसलमानों का ध्यान भटकाया। आज संघ भी वही चाह रहा है कि बाबरी मस्जिद का मुद्दा हो या तीन तलाक का। उसी तरह से मुसलमानों का ध्यान भटकाना चाहती है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला मुसलमानों को तहेदिल से कबूल कर लेना चाहिए। मिल्लीतंजीम इसको तूल ना देकर स्वयं के समझ बुझकर कानून के आइन में ध्यान दें। इस मौके पर मो. रूहुल्ला, डा. इरशाद आलम, मो. शमशाद आलम, मो. शकील, मो. इकबाल, मो. इबरार समेत अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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