बीजेपी को बिहार में आखिरकार मुख्यमंत्री की कुर्सी मिल गई है। इस सफलता पर पार्टी ने ज़रूर राहत की साँस ली होगी, लेकिन उसके सामने अब भी दो बड़ी चिंताएँ बनी हुई हैं। पहली, वह गठबंधन में केवल एक ‘बड़ा साझीदार’ बनकर रह गई है; उसके पास जेडीयू से महज़ चार सीटें ज़्यादा हैं, जो बहुमत के आँकड़े से काफ़ी कम हैं। दूसरी, सम्राट चौधरी ‘संघ परिवार’ की पृष्ठभूमि से नहीं आते; उनका राजनीतिक सफ़र कई अलग-अलग विचारधाराओं से होकर गुज़रा है।
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— Mithilanchal News टीम
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