बिहार विधानसभा चुनाव सिर पर हैं और कांग्रेस पार्टी बिना स्टेट कमेटी के चुनावी तैयारियों में जुटी है। सूत्र बताते हैं कि कमेटी आज से नहीं बल्कि 8 साल से नहीं बनी है। 2015 में कमेटी बनाई गई थी, जो दो साल चली थी। उस समय पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष के पद पर अशोक चौधरी को बिठाया था। इसके बाद 3 प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। सूत्रों के मुताबिक मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम मार्च में बनाए गए हैं लेकिन अब तक इस ओर ध्यान नहीं दिया है। राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि स्टेट कमेटी पार्टी की मजबूत नींव होती है, जो पार्टी को जमीनी स्तर पर जनता से जोड़ती है और राजनीतिक रणनीतियों को लागू करती है। सूत्र बताते हैं कि स्टेट कमेटी के साथ-साथ प्रदेश इलेक्शन, कैंपेन और पॉलिटिकल अफेयर्स जैसी महत्वपूर्ण कमेटियां भी मौजूद नहीं हैं। ये कमेटियां चुनाव के लिए रणनीति बनाने और पार्टी की विचारधारा को वोटरों तक पहुंचाने में महती भूमिका निभाती हैं।
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