जिले में शिक्षा व्यवस्था व छात्र-छात्राओं का भविष्य भगवान भरोसे

    बेगूसराय, ब्यूरो। सुशासन की पहचान करनी हो तो बिहार के शिझा विभाग देखें। किसी भी माध्यमिक व महाविद्यालय में शिक्षकों की कमी के कारण अध्यापन कार्य होता ही नही है। तेघड़ा, बछवाड़ा, भगवानपुर, मंसूरचक, बरौनी प्रखण्ड का एकलोता अंगीभूत कॉलेज एपीएसएम् काॅलेज बरौनी है। जिसकी व्यथा सुनने वाला कोई भी नहीं है। इस काॅलेज में प्राचार्य का पद विगत एक दशक से रिक्त है। इस महाविद्यालय में शिक्षकों के कुल सृजित पद 49 हैं, लेकिन वर्तमान समय में मात्र 10 ही शिक्षक कार्यरत हैं। यह स्थिति विगत एक दशक से है। छात्र-छात्राएं नामांकन कराते हैं लेकिन काॅलेज में क्लास करने नही जाते। परीक्षा फाॅर्म भरने जाते हैं। शिक्षकेतर कर्मियों की भी कमी है। आदेशपाल, रात्रि प्रहरी, लिपिक, लेखपाल, प्रयोगशाला सहायक के भी 90 प्रतिशत पद वर्षों से खली पड़ा हुआ है। माध्यमिक विद्यालयो में इंटर की पढ़ाई तो शुरू कर दी गयी है लेकिन स्कुलों में अध्यापन हेतु शिक्षक है ही नहीं। उदाहरण के लिये आरकेसी बरौनी, बारो, हरपुर, बीहट सहित दो दर्जन से अधिक स्कुल ऐसे हैं, जहां इंटर में नामांकन तो होता है, लेकिन पढ़ाई नही होती है। कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि यहां की शिक्षा व्यवस्था व छात्र-छात्राओं का भविष्य भगवान भरोसे है।



    स्पष्टीकरण:
    https://mithilanchalnews.in पर प्रकाशित कुछ समाचार विभिन्न समाचार स्रोतों की RSS फ़ीड से स्वचालित रूप से लिए जाते हैं। यह सामग्री संबंधित मूल स्रोत की है और इसकी सत्यता, अद्यतन स्थिति या मौलिकता के लिए हम जिम्मेदार नहीं हैं।

    यदि किसी स्रोत या प्रकाशक को कोई आपत्ति हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें। हम शीघ्र उचित कार्रवाई करेंगे।

    Mithilanchal News टीम

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *