केवटी में समैला के तीनों लचका पर अभी भी जमा है बाढ़ का पानी

    केवटी:प्रखंडक्षेत्र में बाढ़ के कहर का असर अभी भी देखा जा रहा है। कुछ इलाकों में पानी घटा है,तो कुछ जगहों पर पानी पूरी तरह जमा है और आवागमन सामान्य होने में अभी भी समय लगेगा। सरकारी राहत नदारद है। यह सिर्फ राहत शिविरों और आंगनबाड़ी केंद्रों तक ही सीमित रह गया है जो लोग घर से गांव से बाहर निकल सकते हैं वे तो किसी तरह राहत शिविर में भी खा लेते हैं। अभी मेहसाजान,ननौरा पंचायत के वार्ड 9,12 के निवासी,असराहा,जलवाड़ा,बनसारा पंचायत के हरिजन टोला, माधोपट्टी के वार्ड 1,2,3, दोमे, पैगम्बरपुर के भट पोखर की आबादी आज भी बाढ़ से घिरी है। यहां के लोगों का हाल बुरा है। एनएच 105 से पानी पूरी तरह से हट गया है लेकिन रनवे-रैयाम पथ में समैला के तीनों लचका पर अभी भी पानी एक तरफ से दूसरी तरफ गिर रहा है। आवागमन में कठिनाई हो रही है।




    शगुना और अधवारा समूह की नदियां अभी भी लबालब भरी है। जिन क्षेत्रों से पानी निकल रहा है,उन क्षेत्रों में बच्चे-बूढ़े,महिलाएं बीमार हो रहे हैं। पशुचारा का घोर अभाव है। पालतू पशु भी बीमार हो रहे हैं। रोपे जा चुके धान की फसल डूब जाने से किसान परेशान हैं। रैयाम धांगर टोली यहां कम-कम सौ धांगर जाती के लोग बसते हैं, इनके घरों तक बाढ़ का पानी पहुंच गया था लेकिन आज तक कोई सरकारी-गैरसरकारी मदद नहीं पहुंचा है, कोई जनप्रतिनिधि खोजने नही पहुंचा है। रैयाम मध्य विद्यालय में चल रहे राहत शिविर में विस्थापित सोमवार को घरों से आकर खा रहे थे और घर लौट रहे थे। ऐसे लोगों को राहत शिविरों में भोजन कराने का क्या औचित्य हैω जरूरत है बीमार पड़ रहे लोगों की देखभाल, टूटे सड़कों की मरम्मत कराने की जिससे आवागन बहाल हो सके।आज भी दर्जनों की संख्या में लोग एनएच के किनारे, बांधों पर और ऊंचे जगहों पर अपने मवेशी,बाल, बच्चों के संग शरण लिए हैं।

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