पटना हाई कोर्ट ने जब एक बार कोई फ़ैसला सुना देता है या फ़ाइनल ऑर्डर पास कर देता है, तो कोई और उस ऑर्डर को पास करके उस ऑर्डर को बदल या वापस नहीं ले सकता। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट को कड़ी फटकार लगाते हुए पटना हाई कोर्ट ने ये बातें कही। कोर्ट ने ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के उस ऑर्डर को भी रद्द कर दिया है जिसमें एक लड़की को चाइल्ड वेलफ़ेयर कमेटी (CWC) की कस्टडी में रखने का आदेश दिया था। कोर्ट ने मजिस्ट्रेट को कड़ी फटकार लगाते हुए आगे कहा कि ससुराल जाने की इजाज़त देने वाले अपने पहले के फ़ाइनल ऑर्डर को रिव्यू करने का भी कोई अधिकार नहीं है। जस्टिस अरुण कुमार झा 28 जनवरी को लड़की की सास की अर्ज़ी मंज़ूर कर ली, जिसमें CWC से उसकी रिहाई की मांग की गई थी। कोर्ट ने मजिस्ट्रेट के पहले के ऑर्डर को बहाल कर दिया, जिसमें महिला को उसके ससुराल लौटने की इजाज़त दी गई थी।
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