कहासुनी में आज :हिंदुस्तान हमारा घर हिंदी हमारी भाषा

    भावनाओं को समझना यूँ सामना ना होता अगर भाषाओं से हमारा पहचान ना होता है।

    हिंदी दिवस की ढेर सारी बधाइयां…………….।।।।।।।।।।।।।।।

    जी हाँ भाषाएं मतलब दूसरों से अपनी भावना जोड़ने का माध्यम , इसके बिना हम सब किसी पशु से कम ना होते।

    विश्व भर में कई भाषाएं बोली जाती है, ऐसे में भारतीयों की पहचान हिंदी भाषा से होती है। हिंदी हमारी शान हमारी पहचान हिंदी का हमारे जीवन में कितना महत्वपूर्ण स्थान है इसे बताने की मुझे नहीं लगता कोई जरूरत है। “मातृभाषा” माता शब्द से हमने इस का स्वागत किया था, और शायद माता शब्द परिभाषित करने की मोहताज नहीं।

    इस मॉडर्नाइजेशन के जमाने में हमने अपनी मातृभाषा को कहा ला छोड़ा है ?

    विचार किया जाए तो यह एक व्यंग होगा। क्या वाकई अब हिंदी हमारे लिए शान रह गई ? नहीं …… ।।।। ऐसा जवाब हो सकता है आपका क्योंकि आपको लगता है कि अब हिंदी बोल बोलना लिखना और पढ़ना महतवपूर्ण नहीं।




    शायद आप गलत ना हो क्योंकि जिस तरह से अंतरराष्ट्रीय भाषा अंग्रेजी ने अपना पैर पसरा है वहां हमारी भाषा हिंदी कुचली हुई नजर आ रही है। और हम भी लगे हुए हैं इसे कुचलने में।

    क्या यह सही है ??

    विचार करें। अपने चीजों को मिटाकर दूसरों की चीजों को अपनाना मॉडर्नाइजेशन नहीं कहलाता है। यह बेवकूफी कहलाता है।

    हमारी पहली प्राथमिकता अपनी भाषा होनी चाहिए फिर दूसरों की। हर तरफ से दूर होता जा रहा हमारी हिंदी भाषा को बचाए रखने की जिम्मेदारी सरकार के साथ साथ हमारी भी है।

    आशा है आप हिंदी दिवस मनाने के साथ-साथ इसे बचाऐ रखने में अपना पूरा योगदान देंगे। .

    जय हिंद जय हिंदी …..।।।।।

    —-सरिता पटेल

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