बिहार के खगड़िया में गरीबी, बेबसी और समाज की संवेदनहीनता की एक ऐसी कहानी सामने आई है,जिसने इंसानियत को कठघरे में खड़ा कर दिया। खगड़िया में एक गरीब महिला अपने पति मन्नु साह के शव के पास तीन दिनों तक बैठी रही, लेकिन अंतिम संस्कार के लिए उसे न पैसे मिले, न कोई सहारा। वह कभी भगवान को कोसती, कभी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती। विवश महिला कभी समाज की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देखती। लेकिन उसकी पुकार सुनने वाला कोई नहीं था।
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— Mithilanchal News टीम
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