Jharkhand High Court: अर्धांगिनी होने का मतलब गुलामी नहीं! पति की याचिका खारिज करते हुए बोला हाई कोर्ट

jharkhand high court झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस एके राय की खंडपीठ ने दांपत्य अधिकारों की बहाली लेकर दाखिल याचिका पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्नी को अपनी नौकरी छोड़कर पति के साथ रहने के लिए विवश नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि नौकरी जारी रखना पति से अलग रहने का एक उचित व वैध कारण हो सकता है। अदालत ने पाकुड़ न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए प्रार्थी जितेंद्र आजाद की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने आगे कहा कि हिंदू पत्नी की धर्मपत्नी या अर्धांगिनी के रूप में पुरानी सोच, जिससे उम्मीद की जाती थी कि वह हमेशा अपने पति का साथ देगी और उसके शरीर का हिस्सा बनकर रहेगी, में अब क्रांतिकारी बदलाव आया है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की बेंच ने यह बात फैमिली कोर्ट के उस आदेश को सही ठहराते हुए कही, जिसमें पति की वैवाहिक अधिकारों की बहाली की याचिका खारिज कर दी गई थी।

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