Makar Sankranti 2026: दही चूड़ा भोज पर अक्सर बदलती है बिहार की सियासी तस्वीर, लालू यादव ने शुरू की थी परंपरा

Makar Sankranti 2026 मकर संक्रांति के मौके पर दही-चूड़ा भोज को लेकर बिहार की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। राजनीति में दही–चूड़ा का भोज एक पारंपरिक आयोजन नहीं, बल्कि इसके पीछे सियासी संकेत भी छिपे हैं। लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के दौर में दही–चूड़ा भोज राजनीतिक मेल-मिलाप और बड़े फैसलों का यह मंच रहा है। दही-चूड़ा भोज के दौरान बिहार के सियासी गलियारे में करीब दो हफ्ते तक सियासत के दोनों खेमों में चूड़ा दही के दावतों का दौर चलता है। भीड़ भी खूब होती है। कोई टिकारी (गया) से गुड़ का तिलकुट (तिल का व्यंजन) मंगाता है तो कोई गंगा के दियारा इलाके से मलाई समेत दही। भागलपुर के कतरनी चावल से बनाए गए चूड़ा की चर्चा भी छाई रहती है। इस भोज में ही कई तरह की राजनीतिक समीकरण बनते और बिगड़ने के भी कई उदाहरण भी हर साल निकल आते हैं।

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