बारिश न होने से किसान मायूस

प्रतिनिधि,गुठनी. भीषण गर्मी और सूखे की समस्या से जूझ रहे किसान धान में लगातार डीजल पंप से पानी दे रहे हैं. कृषि विभाग की माने तो नगर पंचायत और दस ग्राम पंचायतों में 15% किसानो के पास निजी बोरिंग है. 245 किसानों के पास निजी पंपसेट खेती के लिए उपलब्ध है. जिन किसानों ने धान के फसल को खेतों में लगा दिया है. वह उनको बचाने के लिए लगातार पटवन में जुटे हुए हैं. बीएओ तारकेश्वर राम ने बताया कि किसानों को अधिक से अधिक डीजल अनुदान के लिए प्रोत्साहित किया जायेगा है. ताकि उनको राज्य सरकार से फायदा मिल सके. 4554 हेक्टेयर भूमि में धान की खेती का है लक्ष्य प्रखंड में खरीफ खेती के लिए कुल 5339 हेक्टेयर भूमि में खेती करने का लक्ष्य रखा गया है. जिनमे धान के लिए 4554 और मक्के के खेती के लिए 785 हेक्टेयर भूमि निर्धारित है.बीएओ तारकेश्वर राम ने बताया की जुलाई के पहले सप्ताह में धान की बुवाई शुरू कर दिया गया है. पूरे प्रखंड में इस वर्ष 4554 हेक्टेयर भूमि में धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है. वहीं अनुदानित धान बीज लेने के लिए 453 किसानों ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया है. जिनमें करीब 54 क्विंटल धान, 10 क्विंटल मक्का और 30 क्विंटल धईचा का बीज वितरित किया गया है. किसानों ने सूखे की वजह से 55% से कम की बुआई प्रखंड में जून से लेकर जुलाई माह के दूसरे सप्ताह में धान की बुआई किसानों द्वारा कर दिया जाता था. लेकिन इस साल भीषण गर्मी ने प्रखंड के करीब 55 प्रतिशत किसानों ने धान की बुआई ही नहीं किया है. वहीं नहरों में पानी न आने से भी किसान काफी चिंतित है. किसानों का आरोप है की समय रहते नहरों में पानी आ जाता तो उनके धान की फसल को नुकसान नहीं होता.

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