नोटबंदी के एक साल बाद भोजपुर में बढ़ा डिजिटल लेन – देन का प्रचलन

    भोजपुर – आज नोटबंदी का एक वर्ष पूरा हो गया लेकिन भोजपुर जिले में नोटबंदी का मिला- जुला असर देखने को मिला है . नोटबंदी के बाद शहर में डिजिटल लेन – देन में काफी बढ़ोतरी हुई है कई क्षेत्र में काफी लोग कैशलेस हो चुके है इस कारण भोजपुर के बैंको पर दबाव कम हो गया है वही दुकान में काफी मात्रा में पीओएस का उपयोग होने लगा है जबकि जमीनों और मकानों के निबंधन में आधुनिकरण आई है . शराफा बाज़ार और कारोबार पर मिला जुला असर रहा है कभी तेज़ी आई तो कभी कमी आई नोटबंदी के समय में लोगो को शादी विवाह के मामले में थोड़ी परेशानी हुई . नोटबंदी के बाद डिजटल लेन- देन में काफी बढ़ोतरी आई है इस कारण बैको पर भीड़ कम देखने को मिल रहा है . बैको में अधिकतर लोग पैसे जमा ही करने जा रहे है . मोबाइल बैंकिंग सिस्टम और रटीजिएस तथा नेफट का प्रचलन काफी बढ़ गया है और सबसे निचे साक्षरता वाले ही कैश में लेन – देन कर रहे है जबकि औसत से ऊपर साक्षरता वाले अधिक संख्या में कैशलेस हो चुके है . भोजपुर में लगभग ४०% लोग कैशलेस हो चुके है . नोटबंदी के शुरुआत में लोग को थोड़ी परेशानी हुई . पर बाद में सब- कुछ ठीक हो गया .

    मॉल और बड़ी दुकानों में पीओएस का हो रहा है उपयोग, जिले के जितने भी मौल और बड़ी दुकाने है वहां पीओएस का अधिक से अधिक उपयोग हो रहा है काफी कम संख्या में लोग कैश का उपयोग कर रहे है . इतना ही नहीं माध्यम स्तर के दुकानों में भी पीओएस का जोरो से उपयोग हो रहा है . जिले के सभी पेट्रोल पंप पर भी पीओएस का उपयोग हो रहा है . नोटबंदी के बाद जमीनों और मकानों के निबंधन पर मामूली असर पड़ा है नोटबंदी के पहले अधिक संख्या में जमीनों का निबंधन लोगो द्वारा कराया गया है जबकि नोटबंदी के बाद कम लोगो द्वारा जमीनों और मकानों का निबंधन कराया गया है .

    @ बिकेश्वर त्रिपाठी

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