जाने क्या है रमल शास्त्र ज्योतिष :आज की नौवें कड़ी में हम आपके साथ रमल शास्त्र ज्योतिष के ज्ञान को साझा करेंगे

    हमें हर्ष है कि हम आज के नौवें भाग में आ पहुँचे हैं और आप हमारे ज्योतिष शास्त्र के हर भाग को बेहद पसंद कर रहे हैं!
    आज हम रमल शास्त्र के बारे में बात करेंगे !
    प्राचीन पुस्तकों में लिखा है कि रमल शब्द तीन अक्षरों से बना है ,जिसमें ‘ र ‘ का अर्थ रब्बी (ईशवर की आेर) , ‘ म ‘ का अर्थ है मन तथा ‘ ल ‘ का अर्थ है लक्ष्य !
    रमल शास्त्र की उत्पत्ति अरब देशों में हुई थी !
    रमल ग्रंथ को अरबी तथा फारसी में लिख कर उसे पुस्तक का रूप दिया गया और इस शास्त्र का प्रचार- प्रसार किया गया !
    भारत में इस विधा की अलग से वृहद् रचना की गई !




    राजा चौपटमल के नाम के आख़िरी शब्द ‘ मल’जिसका अर्थ है मैल , ‘ र ‘ उपसर्ग रमत शब्द से लिया गया है जिसका अर्थ है खेल , इस प्रकार पासा के माध्यम से खेल खेलते हुए हाथ का मैल उतारना रमल का पूर्ण अर्थ हुआ !
    भारतीय वाङ्मय धन को हाथ का मैल (मल) कहता है इस प्रकार इसका अर्थ दूसरे रूप मे धन का खेल भी हुआ , प्रचीन काल से ही मनुष्य इस खेल का उपयोग धन के लिए करता रहा है !
    भारत में इन पासों को अक्ष ,
    अरब देशों में जायचा और शक्ल तथा पाश्चात्य देशों में इन्हें डाइस कहते हैं !
    चाहे रमल दुनिया के किसी भी भाग का हिस्सा हो परन्तु इसका निर्माण चंद्रमा की विभिन्न कलाओं को आधार बना कर ही किया गया है ! वायु , जल , अग्नि , भूमि इसमें चार बिंदुओं के रूप में प्रदर्शित किए जाते हैं !
    अक्ष के बारे में ऋग्वेद में अनेक प्रकार के मंत्रों की व्याख्या है जिससे रमल शास्त्र से भविष्यवाणी की जा सकती है !
    जायचा , शक़्ल के सोलह अलग-अलग नाम हैं ,जिसके हर एक नाम के हिसाब से भविष्यवाणी करते हैं !
    डाइस असल में चौकोर पासे होते हैं , इसमें दो डाइसों को एक साथ फेंक कर उसका जोड़ निकाला जाता है और उसी को आधार मान कर भविष्य बताया जाता है !
    आज के अंक में हमने कठिन बातों को सरल कर आपके सामने प्रस्तुत करने की कोशिश की है ,हम अपनी इस कोशिश में कितने कामयाब हुए हैं हमें ज़रूर बतायें , धन्यवाद !
    आर.के.लकी..

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