Valentine day special पप्पू यादव अपनी किताब ‘द्रोहकाल का पथिक’में लिखते हैं कि मेरी प्रेम कहानी बड़ी मुश्किल भरी थी। वे अपनी प्रेम कहानी की चर्चा करते हुए कितााब में लिखते हैं कि इसकी शुरूआत वर्ष 1991 में शुरू हुई। तब मैं पटना के बांकीपुर जेल में बंद था। जेल सुपरिटेडेंट के आवास से सटे मैदान में लड़कों को खेलते देखना मुझे अच्छा लगता था। इन्हीं में से एक लड़का था विक्की। विक्की रंजीत का भाई है। वे अपनी किताब में लिखते हैं कि विक्की से खेल के मैदान से ही मेरी नजदीकियां बढ़ गईं। एक दिन विक्की अपनी फैमिली एलबम दिखाई। फैमिली एलबम में ही रंजीत की टेनिस खेलती तस्वीर थी। वह तस्वीर देखते ही मुझे रंजीत से प्यार हो गया। पप्पू यादव लिखते है कि हमने रंजीत रंजन को पहली बार पटना क्लब में देखा था। सेना से रिटायर पिता की बेटी रंजीत रंजन नेशनल व इंटरनेशनल टेनिस खेलतीं थी।
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