कालीदास रंगालय में रंगम पटना के सौजन्य से सआदत हसन मंटू के लिखित नाटक का मंचन किया गया !

    ” अकेली ” नामक इस नाटक का केंद्र सुशीला है !
    सुशीला मोहन के साथ घर से भाग कर रेलवे स्टेशन पहुँचती है , मोहन सुशीला के सारे गहने लेकर उसे प्लेटफॉर्म पर अकेली छोड़ कर भाग जाता है ,

    वहाँ एक अमीर शख़्स किशोर से उसकी मुलाकात होती है , किशोर उसे सहारा देता है और सुशीला से नाचने-गाने का शो करवाता है , दो साल बाद सुशीला किशोर से अपने प्रेम का इज़हार करती है , पर दौलत के नशे में चूर किशोर कहता है ” तुम ग़रीब हो मैं अमीर हुं , तुम्हें मुझसे किसी भी तरह के प्रेम की आशा नहीं रखनी चाहिए , प्यार आखिर होता क्या है मैं नहीं जानता , तू दिवानी है ” !

    सुशीला की मुलाकात मोती से होती है ! दोनों साथ जीने मरने की कसमें खाते हैं और एक दिन मौका देख कर सुशीला मोती के साथ भाग जाती है !
    मोती को तार भेज कर घर बुलाया जाता है ! मोती के जाने के बाद मोती की मंगेतर चपला सुशीला से मिलने आती है और कहती है कि तुम्हारे कारण मोती का भविष्य खतरे में है , मोती के घर वाले उसका त्याग कर देंगे , मोती के सुखी भविष्य के लिए उसे छोड़ दो !

    सुशीला अपने प्यार को दिल में लिए वापस किशोर के पास चली जाती है और नाचने-गाने लगती है !
    मोती वापस आता है और सुशीला को अपने साथ चलने को कहता है !

    सुशीला दिल पर पत्थर रख कर मोती को ग़रीबी का ताना देती है और उसे चले जाने को कहती है !
    इससे आहत होकर मोती शेयर बाज़ार में उतार- चढ़ाव कर किशोर को बरबाद कर देता है ! फ़ोन कर ये बात वो सुशीला को बताता है ! बरबाद हो चुके किशोर को वह बताती है कि मोती उसकी बरबादी का कारण है !

    सुशीला अपनी जिंदगी अब नए सीरे से शुरू करना चाहती है !
    किशोर सुशीला से अपनी मोहब्बत का इज़हार करता है , पर सुशीला का मन अब उदासीन हो चुका है और वह कहती है कि अब काफ़ी देर हो चुकी है !
    नई मंज़िल की तलाश में सुशीला रेलवे स्टेशन पहुँचती है , जहाँ उससे एक मुसाफ़िर पूछता है क्या आपके साथ कोई है ?
    सुशीला कहती है ” मैं अकेली हुं ” !
    सभी कलाकारों ने अपने किरदार के साथ पूरा-पूरा इंसाफ़ किया है और सादत हुसैन ” मंटू ” की कहानी में जान फू़ंक दी है !
    मुख्य कलाकारों में
    सुशीला-ओशीन प्रिया
    किशोर-रास राज
    मोती-उद्दित कुमार
    चपला-उज्जवला गांगुली
    मंच परिकल्पना-संतोष राजपूत
    रूप सज्जा-उदय सागर
    संगीत व संगीत संचालन- ज्ञान पंडित.

    रेशमा ख़ातून
    की
    रिपोर्ट.

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