सजा के हकदार या सहानुभूति के !!! “प्रज्ञा संस्कृति निर्माण संघ”….

    संघ : व्यक्तियों के समूह से बनता है ‘संघ’, पर सवाल उठता है समाज के कैसे व्यक्तियों के समूह से ? जाहिर सी बात है वैसे व्यक्ति जिन्हें कोई स्वार्थ न हो जिनमें सेवा भाव हो वैसे लोग ही तो निशुल्क समाज की सेवा को आगे आते है, यह कहानी “प्रज्ञा संस्कृति निर्माण संघ” की…

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