बिहार में जातिगत जनगणना को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, उठाए गए ये 7 सवाल

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बिहार में जातिगत जनगणना का उद्दा सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. याचिका में जातिगत जनगणना के नोटिफिकेशन को रद्द करने की मांग की गई है. याचिका में कहा गया है कि जातिगत जनगणना का नोटिफिकेशन संविधान की मूल भावना के खिलाफ है. याचिका में सात बिंदुओं के जरिए सुप्रीम कोर्ट के सामने ये मुद्दा उठाया गया है.

याचिका में कहा गया है कि जातिगत जनगणना का नोटिफिकेशन संविधान की मूल भावना के खिलाफ है. लिहाजा अधिसूचना को ही रद्द करने की गुहार सबसे बड़ी अदालत से लगाई गई है. याचिका में सात बिंदुओं के जरिए सुप्रीम कोर्ट के सामने ये मुद्दा उठाया गया है.

संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताया

पहला तो यह कि बिहार में जातिगत जनगणना कराने की कार्यवाही शुरू कर दी गई है. यह संविधान की मूल भावना के खिलाफ है और मूल ढांचे का उल्लंघन है. दूसरा मुद्दा यह कि क्या भारत का संविधान राज्य सरकार को जातिगत आधार पर जनगणना करवाने का अधिकार देता है? तीसरा यह है कि क्या 6 जून को बिहार सरकार के उप सचिव की ओर से जारी अधिसूचना जनगणना कानून 1948 के खिलाफ है?